चीन ने सितंबर में अमेरिका से सोयाबीन का कोई आयात नहीं किया. यह अमेरिकी टैरिफ के जवाब में उठाया गया कदम था. नवंबर 2018 के बाद पहली बार शिपमेंट शून्य हो गया था.

चीनी राजनयिक ने टैरिफ पर अमेरिका को घेरा
भारत में एक चीनी राजनयिक ने अमेरिका की कड़ी आलोचना की है. यह आलोचना डोनाल्ड ट्रंप के चीनी आयात पर अतिरिक्त 100% टैरिफ को लेकर है. इसमें अमेरिकी सॉफ्टवेयर पर निर्यात नियंत्रण भी शामिल है. राजनयिक ने कहा कि वॉशिंगटन के नरम न होने पर चीन उचित जवाब देगा. कोलकाता में चीनी महावाणिज्यदूत शू वेई ने बुधवार को एक कार्यक्रम में बात की. उन्होंने चल रहे अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध पर अपना पक्ष रखा.
‘मजबूर किया गया तो हम जरूर जवाब देंगे’
वेई ने मांग की कि अमेरिका अपनी गलतियां सुधारे. उन्होंने चेतावनी दी कि चीन को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाने होंगे. यह न होने पर चीन मजबूर हो जाएगा. एक पत्रकार के सवाल पर वेई ने चीन का रुख साफ किया. उन्होंने कहा, “हम कोई संघर्ष नहीं चाहते, लेकिन अगर हमें मजबूर किया गया तो हम जरूर जवाब देंगे. हम लड़ेंगे, लेकिन हमारे दरवाजे खुले हैं. हम दोहरा रहे हैं कि सहयोग से दोनों देशों को फायदा होता है.” वेई ने जोर दिया कि भारत और चीन दोनों को रणनीति बनानी चाहिए. यह रणनीति वर्तमान अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध चुनौती का सामना करेगी. सहयोग चीन, अमेरिका और भारत तीनों के लिए आवश्यक है. सहयोग से लाभ होता है, लेकिन टकराव से सभी को नुकसान होता है. उन्होंने बताया कि जनवरी से सितंबर 2025 तक व्यापार $115 बिलियन तक पहुंचा. यह वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत वाणिज्यिक संबंधों को दिखाता है.
चीन ने अमेरिकी सोयाबीन खरीदना बंद किया
चीन ने सितंबर में अमेरिका से सोयाबीन खरीदना बंद कर दिया. यह कदम सीधे तौर पर अमेरिकी टैरिफ का जवाब था. नवंबर 2018 के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि शिपमेंट बिलकुल शून्य रहा. इसके बजाय, चीन ने दक्षिण अमेरिका से आयात तेज़ी से बढ़ाया. चीनी खरीदारों ने अमेरिकी माल से दूरी बना ली. ऐसा दोनों सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव के कारण हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी किसानों को भारी नुकसान होगा. व्यापार वार्ता में प्रगति न होने पर अरबों डॉलर का नुकसान तय है. चीनी व्यापारी दक्षिण अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं से आयात जारी रखेंगे. हालांकि, बीजिंग को अगले साल की शुरुआत में कमी हो सकती है. यह कमी ब्राजील की नई फसल आने से पहले होगी. इससे अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध का प्रभाव गहराएगा.







