भारत बना दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था, जापान पीछे छूटा पर आर्थिक असमानता ने बढ़ाई चिंता

भारत 4.18 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ जापान को पछाड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अमीरी और गरीबी के बीच का फासला अब भी चिंताजनक है.

भारत चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था का गौरव और आर्थिक विकास.
भारत का चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है

साल 2025 के जाते-जाते भारत के लिए एक बड़ी खबर आई. 29 दिसंबर को पीआईबी ने बताया कि भारत अब जापान को पीछे छोड़ चुका है. भारत अब विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. हर भारतीय के लिए यह गर्व का पल है. आजाद भारत को इस मुकाम तक पहुंचने में 75 साल लगे. हमारी पीढ़ी इस बदलाव की गवाह बनी है. लेकिन इस चमक के पीछे एक कड़वा सच भी छिपा है. क्या यह तरक्की वाकई हर घर तक पहुँची है?

आईएमएफ और जीडीपी का लक्ष्य

आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था 4.18 ट्रिलियन डॉलर हो गई है. भारत ने अब जापान का स्थान ले लिया है. रिपोर्ट कहती है कि यह विकास आगे भी जारी रहेगा. अगले तीन वर्षों में भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ सकता है. साल 2030 तक भारत की जीडीपी 7.3 ट्रिलियन डॉलर होने की उम्मीद है. इसका मतलब है कि देश के खजाने में अब पहले से ज्यादा पैसा है.

तरक्की की कड़वी सच्चाई

देश की दौलत तो बढ़ी है, लेकिन आम जनता की हालत नहीं सुधरी. यह पैसा समान रूप से नहीं बांटा गया है. अमीरों की दौलत तेजी से बढ़ी है, जबकि गरीब अब भी अंधेरे में हैं. विकास की यह रफ्तार महलों तक तो पहुंचती है, पर झोपड़ियों को उजाड़ देती है. करोड़ों लोगों के लिए यह तरक्की एक दर्दनाक अनुभव है. क्या गरीबों को पीछे छोड़े बिना विकास संभव नहीं है?

अलीराजपुर का हाल

मध्य प्रदेश का अलीराजपुर जिला इस गरीबी का जीता-जागता उदाहरण है. यहाँ गांवों तक पहुँचने के लिए सड़कें भी नहीं हैं. हजारों लोग आज भी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. अगर वे रोटी जुटाते हैं, तो कपड़ों के लिए पैसे नहीं बचते. 90 फीसदी आदिवासी आबादी वाले इस जिले में लोग बुनियादी चीजों को तरस रहे हैं. नीति आयोग की रिपोर्ट इसे देश का सबसे गरीब जिला मानती है.

वैश्विक गरीबी और वास्तविकता

ओपीएचआई के अनुसार, अलीराजपुर दुनिया के सबसे गरीब क्षेत्रों में से एक है. एक तरफ हम वैश्विक आर्थिक शक्ति हैं, दूसरी तरफ ऐसी गरीबी है. जो अमीरी पेट न भर सके, उस पर गर्व करना मुश्किल है. वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत में अमीरी-गरीबी की खाई दुनिया में सबसे ज्यादा है. देश की अधिकांश संपत्ति केवल कुछ ही लोगों के पास सिमट कर रह गई है.

बढ़ती आर्थिक खाई

देश के शीर्ष 10% अमीरों के पास कुल संपत्ति का 65% हिस्सा है. केवल 1% अमीरों के पास देश की 40% दौलत है. इसका मतलब है कि सिर्फ डेढ़ करोड़ लोग देश की बड़ी संपत्ति पर कब्जा जमाए हैं. 1990 के बाद से अमीरों की संपत्ति 8% की दर से बढ़ रही है. वहीं गरीबों की संपत्ति केवल 4% की दर से बढ़ी है. जब तक यह भेदभाव खत्म नहीं होता, जश्न मनाना अधूरा है.


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