सत्ताधारी दलों पर विपक्षी दलों ने उम्मीदवारों को डराने और नाम वापस लेने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है।

महायुति का निर्विरोध दबदबा
राज्य की तीन प्रमुख सत्ताधारी पार्टियों के कम से कम 68 उम्मीदवार 29 नगर निगमों के महत्वपूर्ण चुनावों में निर्विरोध चुने जा सकते हैं। मालेगांव में इस्लाम पार्टी के एक उम्मीदवार को मिलाकर यह संख्या 69 हो गई है। इस बहुकोणीय मुकाबले में कुल 2,869 सीटें दांव पर हैं। इनमें से भाजपा के 44, शिवसेना के 22 और राकांपा के दो उम्मीदवारों का कोई विरोधी नहीं है।
विपक्ष ने लगाया धांधली का आरोप
नामांकन वापसी के आखिरी दिन शुक्रवार को इन आंकड़ों की पुष्टि हुई। विपक्षी दल अब सत्ताधारी गठबंधन पर निशाना साध रहे हैं। उनका आरोप है कि भाजपा, शिवसेना और राकांपा ने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को डराया या उन्हें नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया। विपक्ष का कहना है कि आखिरी वक्त में प्रलोभन देकर नामांकन वापस कराए गए। चुनाव आयोग ने फिलहाल इन वार्डों में परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है।
चुनावी गढ़ों में बड़ी बढ़त
यह चुनाव राज्य के इतिहास में सबसे अलग माने जा रहे हैं क्योंकि यहां दोस्त दुश्मन और दुश्मन दोस्त बनकर लड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा 22 निर्विरोध उम्मीदवार कल्याण-डोंबिवली (KDMC) में हैं। यह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण का गृहक्षेत्र है। जलगांव में भी 12 उम्मीदवार निर्विरोध हैं, जो मंत्री गिरीश महाजन का जिला है। केडीएमसी में भाजपा के 15 और शिवसेना के 7 उम्मीदवार बिना किसी विरोध के मैदान में हैं।
प्रमुख शहरों की स्थिति
पनवेल में कांग्रेस और पीडब्ल्यूपी के उम्मीदवारों के हटने के बाद भाजपा के 6 प्रत्याशी निर्विरोध रह गए हैं। पुणे नगर निगम की 165 सीटों में से भाजपा की मंजूषा नागपुरे और श्रीकांत जगताप का रास्ता साफ हो गया है। वहां शिवसेना (यूबीटी) और राकांपा (एसपी) के उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए हैं। जलगांव में सत्ताधारी गठबंधन के 12 उम्मीदवारों का कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा है, जिनमें 6 भाजपा और 6 शिवसेना से हैं।
सेंधमारी से डरा विपक्ष
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अपने कुछ उम्मीदवारों को सुरक्षित रखने के लिए दूसरे जिलों में भेज दिया है। जलगांव के एक नेता ने कहा, “हमने यह सुनिश्चित किया है कि हमारे उम्मीदवारों पर दबाव न डाला जाए।” आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि महायुति चुनाव प्रक्रिया में ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा, “विरोधियों को पीछे हटने के लिए मजबूर करने हेतु धनशक्ति का दुरुपयोग हो रहा है।”
भाजपा का पलटवार
भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष अपनी हार देखकर डर गया है। उन्होंने दावा किया, “यह हमारी सरकार की लोकप्रियता और चुनावी रणनीति का परिणाम है।” उपाध्ये के अनुसार, विपक्षी दलों ने नगर निगम के परिणामों का पहले ही अंदाजा लगा लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के हाई-टेक युग में गड़बड़ी छिपाना मुमकिन नहीं है और आरोप सिर्फ अपनी विफलता छिपाने के लिए लगाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग की जांच शुरू
राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। एक अधिकारी ने बताया, “इतनी बड़ी संख्या में निर्विरोध जीत मिलना अभूतपूर्व है।” रिटर्निंग अधिकारियों और पुलिस कमिश्नरों से इन वार्डों की रिपोर्ट मांगी जाएगी। आयोग यह जांच करेगा कि क्या उम्मीदवारों को हटाने के लिए किसी प्रकार का दबाव या लालच दिया गया था। पिछले चुनावों का डेटा उपलब्ध न होने के कारण इसकी तुलना फिलहाल संभव नहीं है।








