नेपाल के जेन-जेड समूह में दरार… सेना मुख्यालय वार्ता का विरोध, कुलमन घीसिंग को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव

सूत्रों का कहना है कि जनरल-जेड के साथ दूसरे दौर की बातचीत के बाद कार्की और प्रसाई सेना नेतृत्व से मिलेंगे। यह मुलाकात नेपाल के मौजूदा राजनीतिक गतिरोध को खत्म करने में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

Nepal Gen-Z Rift Kulman Ghising Interim PM amid Army HQ Talks
नेपाल की राजधानी काठमांडू में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद नेपाली सेना लगातार गश्त कर रही है (फोटो: पीटीआई)

सेना मुख्यालय में गहन चर्चा

नेपाल में नई सरकार के गठन को लेकर सेना मुख्यालय में महत्वपूर्ण वार्ता चल रही है। जेन-जेड समूह के प्रतिनिधि सेना नेतृत्व के साथ चर्चा कर रहे हैं। युवाओं के नेतृत्व वाले समूह के सात सदस्य इस वार्ता के लिए मुख्यालय में मौजूद हैं। इस बीच, मुख्यालय के बाहर जेन-जेड प्रदर्शनकारियों के आपस में भिड़ने से तनाव फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने अब अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में कुलमन घीसिंग के नाम का प्रस्ताव रखा है।

जेन-जेड की वार्ता पर आपत्ति

कई जेन-जेड युवाओं ने सेना मुख्यालय के अंदर चल रही बैठक का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि “गलत लोगों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है।” युवाओं ने मांग की कि ये चर्चाएँ राष्ट्रपति भवन में होनी चाहिए, न कि सेना परिसर में। उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि “ऐसी महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान राष्ट्रपति को उपस्थित रहना चाहिए और उन्हें जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।”

सेना सुरक्षा में कार्की और प्रसाई का प्रवेश

इससे पहले, पूर्व न्यायाधीश सुशीला कार्की और व्यवसायी दुर्गा प्रसाई को कड़ी सुरक्षा में सेना मुख्यालय ले जाया गया। दोनों को सेना द्वारा संरक्षित अलग-अलग वाहनों में ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, जनरल-ज़ी (जनरल-ज़ी) की चर्चा समाप्त होने के बाद, सुशीला कार्की की सेना प्रमुख के साथ बैठक शाम लगभग 4 बजे शुरू होगी। जनरल-ज़ी प्रतिनिधियों और सैन्य नेतृत्व के बीच चल रही यह बातचीत दूसरे दौर की वार्ता का प्रतीक है। इसके समाप्त होने के बाद, कार्की और प्रसाई के सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल से मिलने की उम्मीद है।

क्या इस बैठक से गतिरोध समाप्त हो सकता है?

सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से भी टेलीफोन पर बात की। उन्होंने राष्ट्रपति को वर्तमान स्थिति से अवगत कराया और उन्हें आश्वासन दिया कि “सेना एक राजनीतिक और संवैधानिक समाधान की दिशा में लगातार काम कर रही है।” सूत्रों का दावा है कि सेना जल्द से जल्द संकट का समाधान करने के लिए सभी पक्षों को एक साथ लाने की कोशिश कर रही है। कई लोगों का मानना ​​है कि इस दौर की वार्ता नेपाल में चल रहे सत्ता संघर्ष को समाप्त करने और नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

भारत में राजनीतिक प्रतिध्वनियाँ

नेपाल में राजनीतिक उथल-पुथल ने भारत में भी बहस छेड़ दी है। विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया पर आवाज़ें उठ रही हैं, यह दावा करते हुए कि भारत भी इसी तरह के माहौल का सामना कर रहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “भारत की संस्थाएँ बहुत मज़बूत हैं। भारत में जिस तरह से लोगों की सेवा की जा रही है, उससे साफ़ है कि विपक्ष जनता को गुमराह या भड़का नहीं सकता।”


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