TTP संघर्ष, पश्तून मांग और डूरंड रेखा… अफगानिस्तान-पाकिस्तान जंग की वजह क्या?

TTP संघर्ष अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तेज़ हो गया है। सीमा पर दोनों ओर भारी झड़प हुई। TTP पाकिस्तान में इस्लामी शासन चाहता है। डूरंड रेखा और पश्तून अधिकार की मांग भी संघर्ष में शामिल हैं। हाल के महीनों में TTP के हमले बढ़े हैं।

TTP संघर्ष में डूरंड रेखा
अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान की साझा सीमा पर तनाव बढ़ता जा रहा है। शनिवार रात दोनों देशों में भारी गोलीबारी हुई। तालिबान सरकार ने दावा किया कि उसने “58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया।” वहीं पाकिस्तान का कहना है कि उसने “200 से अधिक तालिबानी लड़ाके मारे,” जबकि उसके 23 जवान मारे गए और 29 घायल हुए। तालिबान ने कहा कि यह कार्रवाई पाकिस्तान की अफगान सीमा और हवाई क्षेत्र में घुसपैठ का जवाब थी।

अफगानिस्तान-पाकिस्तान इस झगड़े की जड़ TTP संघर्ष माना जाता है, जिसे पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है। लेकिन यह विवाद लगभग 130 वर्षों पुराना है। इसमें डूरंड रेखा, TTP को पनाह देना और पश्तूनों की आज़ादी की मांग शामिल हैं। तालिबान के सत्ता में आने के बाद यह संघर्ष और तेज हो गया। आइए तीन मुख्य कारण विस्तार से देखें…

डूरंड रेखा क्या है?

1893 में ब्रिटिशों ने अफगानिस्तान और भारत (अब पाकिस्तान) के बीच 2,640 किमी की सीमा खींची, जिसे डूरंड रेखा कहा जाता है। यह रेखा सर मॉर्टिमर डूरंड के नाम पर है। इसने पश्तून जाति को दो हिस्सों में बाँट दिया — आधे पाकिस्तान में और आधे अफगानिस्तान में चले गए। अफगान सरकार ने कभी डूरंड रेखा को मान्यता नहीं दी। उनका कहना है कि इसे ब्रिटिश शासन ने जबरदस्ती थोप दिया था। दोनों देशों में कुल लगभग 5 करोड़ पश्तून रहते हैं। इनमें से करीब 4 करोड़ पाकिस्तान के खैबर पख़्तूनख्वा, बलूचिस्तान और अन्य इलाकों में रहते हैं, जबकि करीब 1 करोड़ अफगानिस्तान में रहते हैं।

TTP क्या है?

TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) एक सक्रिय आतंकवादी संगठन है जो अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के पास काम करता है। इसकी स्थापना 2007 में हुई थी। यह एक अलग पश्तून राष्ट्र की मांग करता है। नवंबर 2022 में TTP ने पाकिस्तान के साथ शांति समझौता तोड़ दिया। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान सरकार उन्हें छिपाने की जगह देती है, और वे वहीं से पाकिस्तान पर हमला करते हैं। हालांकि, अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी कहते हैं कि “अफगानिस्तान की जमीन पर TTP का कोई सदस्य मौजूद नहीं है।”

TTP की शुरुआत कैसे हुई?

TTP की शुरुआत 2007 में हुई, जब बैतुल्लाह मेहसूद ने 13 विद्रोही गुटों को मिलाया। संगठन का उद्देश्य पाकिस्तान की सेना से लड़ना था। इसमें ऐसे कई गुट शामिल थे, जो सेना के विरोधी थे। यह संगठन पाकिस्तान की सेना के द्वारा नॉर्थ-वेस्ट क़बायली क्षेत्रों (FATA) में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान शुरू करने के बाद बना। पाक सेना का कहना था कि यह अभियान अल-कायदा से जुड़े आतंकियों के खिलाफ था। अब TTP की कमान नूर वली मेहसूद के पास है।

TTP क्या चाहता है?

TTP पाकिस्तान की सरकार को गिराकर वहाँ एक इस्लामिक अमीरात स्थापित करना चाहता है, जो कठोर शरिया कानून पर चले। उसकी सोच अफगान तालिबान जैसी है, लेकिन ये अलग संगठन हैं और उनकी नेतृत्व भी अलग है। TTP कहता है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं अपनाती। फिलहाल यह किसी क्षेत्र पर पूरी तरह हुकूमत नहीं कर पाया, लेकिन खैबर पख़्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में उसकी पहुंच बढ़ रही है।

TTP ने छह महीने में 1,000 से अधिक हमले किए

पिछले छह महीनों में TTP संघर्ष ने पाकिस्तान में 1,000 से अधिक हमले किए। इनमें से 300 से अधिक हमले केवल जुलाई में हुए। 2024 में TTP ने 856 हमले किए — 2023 के 645 से कहीं अधिक। यानी हर दिन 2 से 3 हमले होते हैं। 2025 के ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स के अनुसार, 2024 में TTP की गतिविधियों से 558 मौतें हुईं — जो उस वर्ष के कुल आतंकवादी मौतों का लगभग 52% था।


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