चीन ने झांग शेंगमिन को दी दूसरी सबसे शक्तिशाली सैन्य कुर्सी

चीन में केंद्रीय सैन्य आयोग के अधीन थल, जल और वायु सेना काम करती है। चीन के राष्ट्रपति इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। अब झांग शेंगमिन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। चीन में इसे दूसरा सबसे शक्तिशाली पद माना जाता है। 67 साल के झांग चीनी राष्ट्रपति के खास माने जाते हैं।

झांग शेंगमिन, चीन के नए सैन्य आयोग उपाध्यक्ष और पीएलए भ्रष्टाचार विरोधी प्रमुख।
झांग शेंगमिन, जिनके पास अब चीनी सेना में दूसरा सबसे शक्तिशाली पद है।

कौन हैं झांग शेंगमिन?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने झांग शेंगमिन को केंद्रीय सैन्य आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। चीन में सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष को दूसरा सबसे शक्तिशाली पद माना जाता है। झांग शेंगमिन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के प्रमुख हैं।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार कम्युनिस्ट पार्टी के चौथे अधिवेशन में झांग शेंगमिन के नाम पर मुहर लगी। झांग से पहले इस पद पर हे वेइदोंग काबिज थे। वेइदोंग को एक समय जिनपिंग का खास माना जाता था। हालांकि, भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया।

कौन हैं झांग शेंगमिन?

फरवरी 1958 में शानक्सी में जन्मे झांग शेंगमिन 20 साल की उम्र में चीन की आर्मी से जुड़े। 2010 में झांग की किस्मत तब पलटी जब उन्होंने भूकंप राहत दल का नेतृत्व किया। इसके बाद उनका लगातार प्रमोशन होता रहा।

साल 2017 में झांग को केंद्रीय सैन्य आयोग के अनुशासन निरीक्षण आयोग का सचिव नियुक्त किया गया। इसी साल झांग को 19वीं केंद्रीय समिति का सदस्य भी चुना गया।

झांग को इसके बाद अनुशासन समिति का जिम्मा सौंपा गया। भ्रष्टाचार कमेटी के चेयरमैन रहते हुए झांग ने चीन आर्मी के 8 जनरल की नौकरी खत्म करवा दी। चीन आर्मी के उपाध्यक्ष की नौकरी भी झांग की वजह से ही गई थी।

परमाणु से लेकर रॉकेट तक का अनुभव

झांग शेंगमिन को परमाणु हथियार से लेकर रॉकेट तक का अनुभव है। वह सेना में दोनों ही डिपार्टमेंट में काम कर चुके हैं। चीन में सैन्य आयोग के जो उपाध्यक्ष होते हैं, उन्हें ही सेना का पूरा ऑपरेशन देखना होता है। दरअसल, आयोग के अध्यक्ष राष्ट्रपति होते हैं।

राष्ट्रपति के पास संगठन से लेकर सरकार तक की कई जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे में सेना का पूरा ऑपरेशन सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष को ही देखना होता है। सैन्य आयोग के जो उपाध्यक्ष होते हैं, वे चीन की सर्वोच्च नीतिगत इकाई पोलित ब्यूरो के भी मेंबर होते हैं।


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