मिस्र के शर्म अल-शेख में वैश्विक शांति चर्चा के दौरान पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने 7 से 10 मई की डरावनी रातें याद कीं। डोनाल्ड ट्रंप को संबोधित करते हुए, शहबाज ने कहा कि अगर “इन सज्जन” का हस्तक्षेप न होता, तो भारत-पाकिस्तान संघर्ष की घटनाओं को बताने के लिए “कौन जीवित बचता”, यह पता नहीं।

शर्म अल-शेख में वैश्विक नेताओं का जमावड़ा
यह मौका मिस्र के सुंदर शहर शर्म अल-शेख में सजा था। इसका उद्देश्य गाजा में अमन बहाल करना था। दुनिया के दिग्गज नेता यहां इकट्ठा हुए। असल काम के अलावा खूब कूटनीति और चापलूसी भी हुई। लाल सागर के इस लग्जरी रिसॉर्ट शहर में 20 से अधिक देशों के नेताओं ने भाग लिया।
शहबाज ने ट्रंप को शांति पुरस्कार के लिए नामित किया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति ट्रंप की प्रशंसा की। उन्होंने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया। शहबाज के संबोधन में 7 मई की घटना का जिक्र था। उस समय पहलगाम हमले का जवाब देने के लिए भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।
ऑपरेशन सिंदूर का खौफ किया याद
शहबाज शरीफ के बयान में ऑपरेशन सिंदूर का पूरा खौफ नजर आ रहा था। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ट्रंप ने उस युद्ध में हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो कौन जानता है कि कहानी सुनाने के लिए कौन बचा रहता। उन्होंने जोर देकर कहा कि आखिर भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु शक्तियां हैं।
ट्रंप के शांति प्रयासों की प्रशंसा
गाजा में 67,000 मौतों के बाद हुए इस शांति समझौते के लिए शहबाज ने ट्रंप को बधाई दी। उन्होंने कहा, “मैं कहूंगा कि पाकिस्तान ने राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था, क्योंकि उन्होंने पहले भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोकने और फिर अपनी अद्भुत टीम के साथ युद्धविराम कराने में उत्कृष्ट और असाधारण योगदान दिया था।”
“आज फिर, मैं इस महान राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करना चाहूंगा क्योंकि मुझे सचमुच लगता है कि वे शांति पुरस्कार के लिए सबसे सच्चे और सबसे अद्भुत उम्मीदवार हैं क्योंकि उन्होंने न केवल दक्षिण एशिया में शांति स्थापित की, बल्कि लाखों लोगों की जान बचाई, और आज यहां शर्म अल-शेख में, गाजा में शांति स्थापित की और मध्य पूर्व में लाखों लोगों की जान बचाई।”
‘शांति के मसीहा’ का हस्तक्षेप
ट्रंप को ‘मैन ऑफ पीस’ बताते हुए शहबाज ने ऑपरेशन सिंदूर को याद किया। उन्हें लगा कि अगर उस दिन ट्रंप दखल न देते, तो घटना का वर्णन करने के लिए कोई जिंदा नहीं बचता।
उन्होंने जोर देकर कहा, “बस इतना ही कहना काफी है कि अगर ये सज्जन न होते, तो न सिर्फ़… क्या पता… भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु शक्तियां हैं, अगर उन्होंने अपनी अद्भुत टीम के साथ उन चार दिनों में हस्तक्षेप न किया होता तो युद्ध इस हद तक बढ़ सकता था कि… ये बताने के लिए कौन जिंदा रहता कि क्या हुआ। राष्ट्रपति महोदय इसी तरह यहां गाजा में शांति लाने में आपका और राष्ट्रपति सीसी का अहम योगदान हैं। इतिहास इसे स्वर्णिम शब्दों में याद रखेगा।”
ट्रंप ने पाकिस्तान और सेना प्रमुख की तारीफ की
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अपने संबोधन में पाकिस्तान की खूब तारीफ की। उन्होंने पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर को ‘फेवरिट जनरल’ बताया। ट्रंप ने मंच शहबाज शरीफ को सौंपते हुए कहा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ और मुझे यह भी कहना पड़ेगा कि पाकिस्तान के मेरे फेवरिट फील्ड मार्शल जो यहां नहीं हैं लेकिन प्रधानमंत्री यहां हैं, उन्हें आपको अपना धन्यवाद देना चाहिए…”
भारत-पाकिस्तान संबंधों के लिए उम्मीद
इस कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने मंच से यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि “भारत और पाकिस्तान साथ-साथ बहुत अच्छे से रहेंगे।” उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को याद किया और मंच से कहा, “भारत एक महान देश है जिसके शीर्ष पर मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त है और उसने बहुत अच्छा काम किया है। मुझे लगता है कि पाकिस्तान और भारत साथ-साथ बहुत अच्छे से रहेंगे।”
पाकिस्तान की पहल पर युद्धविराम
ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का रुख बहुत स्पष्ट है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि पाकिस्तान के साथ शत्रुता समाप्त करने पर सहमति सीधी बातचीत के बाद बनी थी। यह बातचीत 10 मई को दोनों सेनाओं के DGMOs के बीच हुई थी। इसके लिए पाकिस्तान ने अपील की थी। भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचों को निशाना बनाया था।







