अमेरिकी प्रतिबंधों पर रूस की दो टूक, दुनिया को हमसे ज्यादा भुगतना होगा असर

चीन ने भी अमेरिका के इन नए प्रतिबंधों पर कड़ी आपत्ति जताई. बीजिंग ने कहा कि ये ‘एकतरफा कदम हैं जिनका कोई अंतरराष्ट्रीय कानूनी आधार नहीं है.’

रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिका रूस प्रतिबंध के बीच चीन का विरोध और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 15 अगस्त, 2025 को अलास्का के ज्वाइंट बेस एल्मेंडोर्फ-रिचर्डसन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत करते हुए। (Photo: AFP Via Getty Images)

अमेरिका ने रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. इसके बाद रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा कि ये कदम ‘उल्टा असर’ डालेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि ये वैश्विक अर्थव्यवस्था को रूस से ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे.

रूस की चेतावनी प्रतिबंध बेअसर रहेंगे

जाखारोवा ने जोर देकर कहा कि अमेरिका के ये दंडात्मक कदम रूस को मजबूर नहीं कर पाएंगे. रूस अपने राष्ट्रीय हितों पर कोई समझौता नहीं करेगा. उन्होंने बताया कि रूस बातचीत के लिए तैयार है. लेकिन यह बातचीत कूटनीतिक माध्यमों से ही होनी चाहिए. मीडिया बयानबाजी से बातचीत संभव नहीं है. उन्होंने कहा, ‘यह कदम पूरी तरह से विपरीत प्रभाव डालने वाला है.’ यह यूक्रेन संघर्ष के समाधान की दिशा में सार्थक वार्ता की संभावना को कठिन बना देगा. जाखारोवा ने यह भी कहा कि रूस ने पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रति मजबूत प्रतिरोध क्षमता विकसित कर ली है. देश आत्मविश्वास के साथ अपनी आर्थिक और ऊर्जा क्षमता को आगे बढ़ाता रहेगा.

चीन की भी अमेरिका को नसीहत

चीन ने भी गुरुवार को अमेरिका के इन नए प्रतिबंधों पर कड़ी आपत्ति जताई. बीजिंग ने कहा कि ये ‘एकतरफा कदम हैं जिनका कोई अंतरराष्ट्रीय कानूनी आधार नहीं है.’ चीन ने अमेरिका से कहा कि दबाव या जबरदस्ती की नीति छोड़ें. इसके बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए. चीन ने यूरोपीय संघ के हालिया प्रतिबंधों की भी आलोचना की. इन प्रतिबंधों में कुछ चीनी कंपनियों पर रूस की मदद करने के आरोप थे. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ ने कहा, ‘चीन न तो यूक्रेन संकट का निर्माता है, न ही उसका पक्षधर.’ “हम उन सभी कदमों का विरोध करते हैं जो चीनी कंपनियों के वैध हितों को नुकसान पहुंचाते हैं.”

विश्लेषकों का मानना है कि रूस और चीन की यह संयुक्त प्रतिक्रिया एक मजबूत मोर्चा बना सकती है. यह मोर्चा अमेरिका के बढ़ते प्रतिबंधों के खिलाफ काम करेगा. दोनों देश पहले ही डॉलर पर निर्भरता कम करने का काम कर रहे हैं. वे वैकल्पिक व्यापार प्रणाली विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस और चीन मिलकर ऊर्जा और व्यापार सहयोग को और मजबूत करते हैं. तो इससे पश्चिमी देशों की आर्थिक नीतियों पर असर पड़ सकता है. वैश्विक शक्ति संतुलन में भी बदलाव देखने को मिल सकता है.


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