डोनाल्ड ट्रंप ने महमूद अब्बास को नए फिलिस्तीनी मुखिया के रूप में खारिज किया

महमूद अब्बास इस समय फिलिस्तीन प्राधिकरण के राष्ट्रपति हैं. गाजा समझौते के बाद उन्हें ही नए फिलिस्तीन के राष्ट्रपति बनाने की बात चल रही थी. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनके नाम को पूरी तरह नकार दिया है. ट्रंप ने अब्बास को उम्रदराज व्यक्ति बताया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलिस्तीनी नेता महमूद अब्बास के भविष्य पर टिप्पणी की
फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास, अंकारा, तुर्की की यात्रा के दौरान, 25 जुलाई, 2023। (Photo: Rıza Ozel—dia images/Getty Images)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा समझौते के दौरान फिलिस्तीन के अगले राष्ट्रपति पर एक बड़ा बयान दिया है. ट्रंप ने साफ कहा कि महमूद अब्बास स्वतंत्र फिलिस्तीन के राष्ट्रपति नहीं बन सकते हैं. वे निश्चित रूप से समझदार हैं. लेकिन अभी फिलिस्तीन को जिस तरह के नेता की आवश्यकता है, महमूद अब्बास उसमें फिट नहीं बैठते हैं.

महमूद अब्बास वर्तमान में फिलिस्तीन प्राधिकरण के प्रमुख हैं. एक नया फिलिस्तीन राष्ट्र बनने पर अब तक उन्हीं को कमान मिलने की बात कही जा रही थी.

ट्रंप ने बरगौती के पक्ष में बात की

टाइम मैगजीन से बातचीत करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “मैं महमूद अब्बास से मिल चुका हूं.” उन्होंने आगे कहा, “उन्हें फिलिस्तीन के बारे में जानकारी जरूर है.” लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया, “वे फिलिस्तीन के नेता नहीं बन सकते हैं.” ट्रंप ने अब्बास को एक बुजुर्ग शख्स भी बताया है. एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि मैं इजराइली जेल में बंद मारवान अल-बरगौती की रिहाई के लिए बेंजामिन नेतन्याहू से बात करूँगा. मैंने उन्हें तुरंत रिहा कराने का फैसला कर लिया है.

हमास बरगौती को राष्ट्रपति बनाने की कोशिश कर रहा है. बरगौती को इजराइल ने 2002 में गिरफ्तार किया था. तब से वे जेल में ही बंद हैं. मारवान बरगौती को फिलिस्तीनी प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है.

कौन हैं महमूद अब्बास?

महमूद अब्बास फिलिस्तीन प्राधिकरण के प्रमुख हैं. अब्बास को यह जिम्मेदारी साल 2005 में मिली थी. यासर अराफात फिलिस्तीन प्राधिकरण के पहले प्रमुख थे. 1935 में फिलिस्तीन के गलील में जन्मे अब्बास ने अपनी पढ़ाई-लिखाई सीरिया से की है.

फिलिस्तीन प्राधिकरण के प्रमुख बनने से पहले वे इसके प्रधानमंत्री थे. महमूद अब्बास यासर अराफात के साथ फिलिस्तीन आंदोलन से जुड़ गए थे. वर्तमान में अब्बास ही संयुक्त राष्ट्र की बैठक में फिलिस्तीन का पक्ष रखते हैं. हालांकि, फिलिस्तीन में उनका विरोध होता है. फिलिस्तीनी लोगों का कहना है कि वे अमेरिका और यूरोपीय देशों के इशारों पर काम करते हैं. फिलिस्तीन का उग्रवादी संगठन हमास भी अब्बास को पसंद नहीं करता है.

नई सरकार गठन की कवायद

गाजा समझौते के बाद फिलिस्तीन में एक नई सरकार के गठन की कवायद की जा रही है. समझौते के तहत सरकार में हमास की कोई भूमिका नहीं रहेगी. वहीं, हमास का कहना है कि गाजा में किसी भी बाहरी सरकार को स्वीकार नहीं किया जाएगा. यही कारण है कि गाजा को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है.


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